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| दुमका गणेश पूजा 2026: पोखरा चौक, रसिकपुर और बाउरी पाड़ा के भव्य पूजा पंडालों की एक झलक। |
दुमका दर्पण संवाददाता | दुमका: उपराजधानी दुमका आज पूरी तरह से गणेशोत्सव के उल्लास और भक्ति में सराबोर नजर आ रही है। सुबह से ही शहर की गलियों में पूजा के शंख-घंटियों की मधुर ध्वनि, अगरबत्तियों की खुशबू और "गणपति बप्पा मोरया" के जयकारे गूंज रहे हैं। यूं तो पूरे शहर में त्योहार की रौनक देखते ही बनती है, लेकिन इस बार शहर के तीन अलग-अलग कोनों में स्थापित बप्पा की मूर्तियां अपनी अलग बनावट और अनूठी छटा के कारण लोगों का मन मोह रही हैं।
पोखरा चौक पर असुरों का संहार करते दिखे षडभुजा गणेश
शहर के पोखरा चौक पर श्री श्री 108 सार्वजनिक गणेश पूजा समिति की ओर से तैयार की गई झांकी बेहद अनोखी और भव्य है। यहां बप्पा का छह भुजाओं (षडभुजा) वाला वीर स्वरूप स्थापित किया गया है, जिसमें वे अधर्म और असुरों का नाश करते दिख रहे हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, खड्ग और गदा जैसे दिव्य अस्त्र सुसज्जित हैं, जबकि पृष्ठभूमि में कैलाश पर्वत पर विराजे भगवान शिव और माता पार्वती का दृश्य इस पूरी प्रतिमा को एक अलग ही भव्यता प्रदान कर रहा है। पास ही हाथ जोड़े खड़े मूषक राज की भक्ति भी देखते ही बनती है।
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| पोखरा चौक, दुमका: असुरों का संहार करते छह भुजाओं वाले 'षडभुजा गणेश'। |
रसिकपुर: सिंहासन पर विराजे बप्पा का सौम्य और राजसी अंदाज
रसिकपुर रेलवे स्टेशन रोड का नजारा पोखरा चौक से बिल्कुल अलग और मन को भीतर तक शांत कर देने वाला है। यहां भगवान गणेश एक नक्काशीदार भव्य सिंहासन पर बड़े ही राजसी अंदाज में विराजमान हैं। पीतांबरी वस्त्र, कानों में कुंडल और सिर पर जगमगाता मुकुट धारण किए बप्पा एक हाथ में गदा थामे और दूसरे हाथ से भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीष दे रहे हैं। पंडाल को पीले-नारंगी पर्दों, ताजे फूलों के गुलदस्तों और ऊपर गोल झूमरनुमा रोशनी से इतने करीने से सजाया गया है कि वहां पहुंचते ही एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है।
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| रसिकपुर रेलवे स्टेशन रोड, दुमका: भव्य सिंहासन पर राजसी मुद्रा में विराजमान विघ्नहर्ता। |
बाउरी पाड़ा (नेशनल स्कूल के पीछे): धनुर्धारी गजानन और साथ में शिव-पार्वती के साक्षात दर्शन
इधर नेशनल स्कूल के पीछे, बाउरी पाड़ा में भी इस बार बेहद विशाल और भव्य पंडाल तैयार किया गया है। यहां बप्पा का एक बिल्कुल अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। भगवान गणेश हाथ में धनुष-बाण और त्रिशूल थामे, एक पैर चट्टान पर टिकाए बड़े ही तेजस्वी और वीर मुद्रा में खड़े हैं। पंडाल में फूलों और खूबसूरत पर्दों के बीच उनकी यह प्रतिमा काफी प्रभावशाली लग रही है। खास बात यह है कि मुख्य प्रतिमा के आगे भगवान शिव और माता पार्वती की भी बेहद सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो पूरा शिव परिवार ही भक्तों को आशीर्वाद देने धरती पर उतर आया हो। हालांकि अभी भी समिति के लोग प्रतिमा और वेदी के अंतिम शृंगार और साज-सज्जा को पूरा करने में जुटे हुए हैं, लेकिन बिना पूरे शृंगार के भी प्रतिमा का तेज देखते ही बनता है।
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| बाउरी पाड़ा (नेशनल स्कूल के पीछे), दुमका: धनुर्धारी रूप में विराजे गणेश जी एवं शिव-पार्वती की युगल प्रतिमा। |
शाम ढलते ही सजेगा मेला, परिवार संग निकलने की कर लीजिए तैयारी
दिनभर की पूजा-अर्चना और तैयारियों के बाद अब सबकी नजरें शाम पर टिकी हैं। पोखरा चौक, रसिकपुर और खासकर बाउरी पाड़ा के विशाल पंडाल परिसर में शाम होते ही रंग-बिरंगी दूधिया रोशनी जगमगा उठेगी और पारंपरिक मेले का रंग जमेगा। बच्चों के लिए झूले, खिलौनों की दुकानें और चाट-पकौड़ी के स्टॉल सजने लगे हैं। अगर आप भी दिनभर की भागदौड़ के बाद अपने परिवार और बच्चों के साथ त्योहार का असली आनंद लेना चाहते हैं, तो आज शाम घर से जरूर निकलिए और बप्पा के इन तीनों अद्भुत रूपों का दर्शन कर उनका आशीर्वाद लीजिए।




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