दुमका में भगवान जगन्नाथ मौसीबाड़ी में विराजमान, सात दिनों तक होंगे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

दुमका में मौसीबाड़ी में विराजमान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का सात दिवसीय धार्मिक आयोजन

दुमका दर्पण | दुमका | 17 जुलाई 2026

दुमका में इस्कॉन (ISKCON) द्वारा आयोजित भगवान श्रीजगन्नाथ की भव्य रथयात्रा के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा को पोखरा चौक स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मारक स्थल (मौसीबाड़ी/गुंडिचा मंदिर) में विधि-विधान के साथ विराजमान कराया गया। आगामी सात दिनों तक भगवान यहीं विराजमान रहेंगे, जहां श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे से शुरू होंगे कार्यक्रम

इस्कॉन दुमका के अनुसार सात दिवसीय कार्यक्रमों की शुरुआत प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे मंगला आरती से होगी। इसके बाद दर्शन आरती, भोग आरती, श्रीमद्भागवतम् कथा, श्रीमद्भगवद्गीता पाठ, भजन-कीर्तन तथा अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने बांधा समां

शुक्रवार शाम संध्या आरती के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में दुर्गापुर स्थित आम्रपाली कला केंद्र की टीम ने भजन, कीर्तन और भक्तिमय नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

इस्कॉन अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं से की सहभागिता की अपील

इस्कॉन दुमका के अध्यक्ष एच.डी. सत्यबाक गुरुदास प्रभु ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ की कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से इस धार्मिक आयोजन का आयोजन किया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सातों दिनों तक मौसीबाड़ी पहुंचकर भगवान के दर्शन करने, प्रसाद ग्रहण करने और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की।

उन्होंने बताया कि आगामी छह दिनों तक भी प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें दुमका और आसपास के क्षेत्रों के कलाकार भजन, कीर्तन, नृत्य और अन्य भक्तिमय प्रस्तुतियां देंगे।

श्रद्धालुओं से परिवार सहित शामिल होने का आग्रह

इस्कॉन दुमका ने जिले के श्रद्धालुओं और नगरवासियों से सात दिवसीय आयोजन में परिवार सहित शामिल होने की अपील की है। आयोजन के दौरान प्रतिदिन भगवान श्रीजगन्नाथ के दर्शन, धार्मिक प्रवचन, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी।

दुमका दर्पण का नजरिया: भगवान श्रीजगन्नाथ की मौसीबाड़ी परंपरा दुमका वासियों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। ऐसे आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक सहभागिता और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देते हैं। स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की विश्वसनीय जानकारी पाठकों तक पहुंचाना दुमका दर्पण की प्राथमिकता है।

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