दुमका दर्पण ब्यूरो | दुमका
झारखंड के महान जननायकों एवं संताल हूल आंदोलन के अमर शहीदों की स्मृति में मंगलवार को जन शिक्षण संस्थान विकास भारती, दुमका में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ हूल दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के पदाधिकारियों, कर्मचारियों, प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षणार्थियों ने वीर शहीद सिदो-कान्हू, चाँद-भैरव तथा फूलो-झानो की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक अवसर नहीं, बल्कि अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से शहीदों के आदर्शों को आत्मसात करते हुए शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम का शुभारंभ वीर शहीद सिदो-कान्हू, चाँद-भैरव एवं फूलो-झानो की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने हूल आंदोलन के अमर शहीदों के संघर्ष, साहस और बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान संस्थान परिसर में श्रद्धा, सम्मान और ऐतिहासिक गौरव का वातावरण बना रहा।
हूल दिवस संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक : दीपक कुमार सिंह
कार्यक्रम पदाधिकारी दीपक कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हूल दिवस आदिवासी समाज के साहस, स्वाभिमान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की अमर गाथा है। उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हू एवं उनके साथियों का बलिदान आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने युवाओं से इतिहास से प्रेरणा लेकर समाज और देश के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।
नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा हूल आंदोलन का इतिहास
सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी (आजीविका) दर्शन हेम्ब्रम ने कहा कि हूल दिवस झारखंड की सांस्कृतिक पहचान, आदिवासी अस्मिता और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समाज की जिम्मेदारी है कि वह अपने महापुरुषों के संघर्ष, त्याग और मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाए, ताकि उनका इतिहास सदैव जीवंत बना रहे।
शिक्षा और कौशल विकास से आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव
सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी श्रीराम कुशवाहा ने कहा कि वर्ष 1855 का संताल हूल आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने युवाओं से शहीदों के आदर्शों को आत्मसात करते हुए शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से आत्मनिर्भर समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आज के समय में कौशल विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा युवाओं को सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक एकता का दिया संदेश
अकाउंटेंट प्रदीप कुमार शर्मा ने कहा कि अमर शहीदों का बलिदान हमें ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है। वहीं एम.आई.एस. प्रभारी मृत्युंजय कुमार पंजियार ने कहा कि हूल दिवस हमें अपने इतिहास को समझने, सामाजिक एकता बनाए रखने और देश के प्रति अपने दायित्वों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करने की सीख देता है।
प्रशिक्षुओं को बताया गया हूल आंदोलन का महत्व
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षणार्थियों को वर्ष 1855 के संताल हूल आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सिदो-कान्हू के नेतृत्व में हुए जनविद्रोह तथा अमर शहीदों के योगदान की विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि हूल आंदोलन केवल आदिवासी समाज तक सीमित नहीं था, बल्कि यह अन्याय और शोषण के विरुद्ध जनसंगठित प्रतिरोध का एक ऐतिहासिक उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में इतिहास के प्रति रुचि, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करते हैं।
इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में कार्यक्रम पदाधिकारी दीपक कुमार सिंह, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी श्रीराम कुशवाहा, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी (आजीविका) दर्शन हेम्ब्रम, अकाउंटेंट प्रदीप कुमार शर्मा, एम.आई.एस. मृत्युंजय कुमार पंजियार, ऑफिस असिस्टेंट सविता किस्कू, मनोज हेम्ब्रम सहित संस्थान के प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन अमर शहीदों के आदर्शों पर चलने तथा समाज में शिक्षा, कौशल विकास और जागरूकता के प्रसार का सामूहिक संकल्प लेकर किया गया।
दुमका दर्पण का नजरिया
हूल दिवस केवल अतीत की स्मृतियों को दोहराने का अवसर नहीं, बल्कि समाज में शिक्षा, कौशल, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करने का भी संदेश देता है। जन शिक्षण संस्थान जैसे कौशल विकास केंद्रों में आयोजित ऐसे कार्यक्रम युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।



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