Dumka News: जन शिक्षण संस्थान विकास भारती दुमका में दो दिवसीय प्रशिक्षक क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

जन शिक्षण संस्थान विकास भारती दुमका में दो दिवसीय प्रशिक्षक क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम

दुमका दर्पण , 31 जुलाई 2026। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में संचालित जन शिक्षण संस्थान विकास भारती, दुमका द्वारा दुधानी स्थित कार्यालय परिसर में 30 एवं 31 जुलाई 2026 को सभी प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षिकाओं के लिए दो दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम (प्रशिक्षक क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम) का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ाना तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना था।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं राष्ट्रभक्ति गीत "वंदे मातरम्" के साथ हुआ। इस अवसर पर आमंत्रित अतिथियों एवं विशेषज्ञ वक्ताओं का स्वागत अंगवस्त्र भेंट कर किया गया।

कार्यक्रम में लीड बैंक, दुमका के प्रतिनिधि श्री सुधीर कुमार, गवर्नमेंट आईटीआई कॉलेज, दुमका के प्रशिक्षण अधिकारी श्री विनोद नंदी तथा एसबीआई मेन ब्रांच, दुमका के प्रतिनिधि श्री पीयूष जी विशेषज्ञ वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

कौशल विकास को समाज निर्माण से जोड़ने पर दिया गया जोर

कार्यक्रम की शुरुआत में जन शिक्षण संस्थान विकास भारती, दुमका के निदेशक श्री मोती उपाध्याय ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य एवं महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण को केवल प्रमाण-पत्र तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए सक्षम बनाना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल डिग्री पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसके साथ कौशल का होना भी आवश्यक है। प्रशिक्षकों से उन्होंने अपील की कि वे प्रशिक्षणार्थियों को ऐसा व्यावहारिक प्रशिक्षण दें, जिससे वे प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें।

निदेशक ने बताया कि जन शिक्षण संस्थान एवं ट्राइबल स्किलिंग सेंटर, दुमका के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 2700 युवाओं एवं महिलाओं को विभिन्न ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक कौशल प्रशिक्षण पहुंचाकर अधिक से अधिक लोगों को आजीविका से जोड़ना है।

जन शिक्षण संस्थान विकास भारती दुमका के दो दिवसीय क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षक एवं प्रशिक्षिकाएं

वित्तीय साक्षरता एवं बैंकिंग की दी गई जानकारी

लीड बैंक, दुमका के प्रतिनिधि श्री सुधीर कुमार ने प्रशिक्षकों को वित्तीय साक्षरता, बचत, निवेश, बैंकिंग सेवाओं तथा बीमा के महत्व की जानकारी दी।

उन्होंने आय के अनुरूप खर्च करने, नियमित बचत की आदत विकसित करने, आपातकालीन फंड तैयार रखने तथा वित्तीय योजनाओं का सही उपयोग करने पर जोर दिया। इसके साथ ही बचत खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD), ऋण, क्रेडिट स्कोर, जीवन बीमा एवं स्वास्थ्य बीमा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं।

आईटीआई एवं तकनीकी शिक्षा के अवसरों की जानकारी

गवर्नमेंट आईटीआई कॉलेज, दुमका के प्रशिक्षण अधिकारी श्री विनोद नंदी ने युवाओं के लिए तकनीकी एवं कौशल आधारित शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने आईटीआई में संचालित विभिन्न ट्रेड, प्रवेश प्रक्रिया, ऑनलाइन आवेदन, मेरिट सूची तथा रोजगार के अवसरों की जानकारी देते हुए प्रशिक्षकों से कहा कि वे अधिक से अधिक युवाओं को तकनीकी शिक्षा के लिए प्रेरित करें।

बैंकिंग सेवाओं एवं उद्यमिता पर विशेष सत्र

एसबीआई मेन ब्रांच, दुमका के प्रतिनिधि श्री पीयूष ने बैंकिंग सेवाओं, बचत खाते, स्टार्टअप एवं उद्यमिता से जुड़ी बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार के पास कम से कम एक सक्रिय बैंक खाता होना चाहिए तथा बैंक जरूरत के अनुसार नियमानुसार मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराने के लिए सदैव तैयार है।

प्रशिक्षण एवं बैच संचालन की पूरी प्रक्रिया समझाई गई

जन शिक्षण संस्थान विकास भारती, दुमका के सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी श्रीराम कुशवाहा ने नए प्रशिक्षण बैच के संचालन की संपूर्ण प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत सर्वेक्षण एवं मोबिलाइजेशन से होती है। इसके बाद प्रशिक्षणार्थियों का पंजीकरण, ई-केवाईसी, आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन, बैच निर्माण, उद्घाटन, प्रशिक्षण केंद्र की व्यवस्थाएं, रजिस्टर संधारण, प्रतिवेदन तैयार करना तथा अंतिम मूल्यांकन जैसी सभी प्रक्रियाओं का निर्धारित मानकों के अनुरूप पालन किया जाता है।

उन्होंने प्रशिक्षकों से कहा कि प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को केवल नामांकन संख्या के रूप में नहीं, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य की जिम्मेदारी के रूप में देखें। प्रशिक्षण की गुणवत्ता, नियमित उपस्थिति, व्यावहारिक अभ्यास, सही दस्तावेजीकरण एवं समय पर मूल्यांकन किसी भी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं।

स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसरों पर हुई चर्चा

सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी (आजीविका) श्री दर्शन हेंब्रम ने प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने स्वयं सहायता समूहों (SHG), सामूहिक उद्यम एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आजीविका के अवसरों की जानकारी दी। साथ ही जन शिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त कर सफल स्वरोजगार कर रहे प्रशिक्षणार्थियों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण के बाद भी प्रशिक्षणार्थियों का मार्गदर्शन जारी रखने की अपील की।

प्रशिक्षण के अंत में हुआ मूल्यांकन

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में सभी प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षिकाओं का मूल्यांकन (Assessment) कराया गया, ताकि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं समझ का आकलन किया जा सके।

समापन अवसर पर निदेशक श्री मोती उपाध्याय ने कहा कि जन शिक्षण संस्थान विकास भारती, दुमका का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं एवं महिलाओं को कौशल के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना है।

उन्होंने प्रशिक्षकों से पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ प्रशिक्षण कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि एक सक्षम प्रशिक्षक ही कुशल समाज के निर्माण की मजबूत नींव रखता है।

कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में अकाउंटेंट प्रदीप कुमार शर्मा, एमआईएस प्रभारी मृत्युंजय कुमार पंजियारा, प्रोग्राम सहायक आनंद कुमार, सविता किस्कू, मनोज हेंब्रम सहित जन शिक्षण संस्थान विकास भारती, दुमका के लगभग 40  प्रशिक्षक एवं प्रशिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

स्रोत: जन शिक्षण संस्थान विकास भारती, दुमका द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर यह समाचार तैयार किया गया है।

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